Brijmohan Agrawal

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BRIJMOHAN AGRAWAL

 

दमन के विरूद्ध हर व्यक्ति की मुखर आवाज बनने वाले श्री बृजमोहन अग्रवाल एक ऐसे व्यक्तित्व हैं जिन्होंने न केवल विशाल समर्पण दिखाया बल्कि छत्तीसगढ़ राज्य के प्रतिनिधित्व का मार्ग प्रशस्त करने हेतु अथक प्रयास भी किया।

एक महत्वपूर्ण साम्राज्यवादी विरोधी, समाजवादी और पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले श्री अग्रवाल युवावस्था से ही दमनकारियों के खिलाफ एक धधकती ज्वाला की तरह थे। दुर्गा कॉलेज (पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय) के विद्यार्थी रह चुके श्री अग्रवाल ने राज्य में एबीवीपी (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपने कॉलेज के दिनों में एक क्रांतिकारी नेता रह चुके श्री बृजमोहन अग्रवाल ने राज्य के बेहतर भविष्य के लिए अपना जीवन दांव पर लगा दिया। एक कार्यकर्ता के रूप में अपने लोगों के अधिकारों और सही व गलत का निर्णय करते हुए तथा एक रणनीतिज्ञ के रूप में “जैसे को तैसा“ की नीति पर चलते हुए कुशल नीति निर्धारक के रूप में आमूल-चूल परिवर्तन के वाहक बने। स्वयं के राजनीतिक सिद्धांतों के अधीन रहते हुए तथा किसी भी नियम या नीतियों की अवहेलना किये बिना उन्होंने सशक्तिकरण, शिक्षा व सुधार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव किये।

वर्तमान में, कृषि और सिंचाई, पशुपालन, कैबिनेट मंत्री व अन्य विभागों समेत जनता की सेवा में समर्पित श्री बृजमोहन अग्रवाल पहली बार निर्वाचित होकर 1990 में अविभाजित मध्य प्रदेश में सबसे कम उम्र के युवा विधायक बने। यह उनके निरंतर संघर्ष और अभ्यास का ही परिणाम था कि उन्होंने राजनीति में गहरी जड़ें रखने वालों को बहुत ही कम उम्र में चुनौती दी। उनकी ये सभी विशिष्टताएं उन्हें कम उम्र में ही दूसरों से अलग करती हैं। सन् 1997 में उन्हें “सर्वश्रेष्ठ विधायक“ के रूप में सम्मानित किया गया।

श्री अग्रवाल छत्तीसगढ़ के नए राज्य के निर्माण की वकालत करने वाले प्रमुख चेहरों में से एक थे। इतना ही नहीं, भारतीय जनता पार्टी के सदस्य के रूप में श्री बृजमोहन अग्रवाल ने, “कांग्रेस के अभेद्य किले“ को भेदने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक नवगठित राज्य के रूप में उन्होंने भाजपा के अन्य नेताओं के साथ-साथ बदलावों और विकास की लहरों की शुरुआत की और छत्तीसगढ़ में भाजपा के कद को ऊपर उठाने में मदद की।

यह एक संयोग है कि 1 मई, 1959 को जन्म लेने वाले श्री अग्रवाल का जन्मदिन विश्व मजदूर दिवस के साथ मनाया जाता है। उन्होंने हमेशा राज्य की विविधता पर जोर देते हुए छत्तीसगढ़ में महिलाओं के अधिकारों के साथ-साथ रोजगार संकट से निपटने के लिए खुले तौर पर आवाज उठाई। वर्षों से अपने समर्पित और प्रतिबद्ध सेवा के माध्यम से, उन्होंने छत्तीसगढ़ के लोगों के दिलों को जीत लिया है, जिससे जनता उन्हें प्यार से “मोहन भैया“ कहकर बुलाती है। सदैव अपने लोंगों के साथ खड़े रहने वाले मोहन भैया वर्तमान समय में प्रचलित जातिगत भेदभाव, धर्म आधारित राजनीति व अवसरवादिता से हमेशा दूर रहे हैं।