gained pride of triveni sangam of Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के त्रिवेणी संगम की बढ़ी शान

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पांचवें कुंभ के रूप में राजिम को मिली पहचान
संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने राजिम कुंभ से कैसे बढ़ाया प्रदेश का मान

राजिम कुंभ के रूप में संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की आश्चर्यजनक सोच ने छत्तीसगढ़ को देश की अध्यात्मिक बिरादरी से न सिर्फ जोड़ा बल्कि कुंभ पट्टी में छत्तीसगढ़ को पहुंचा कर स्थानीय जनसमाज को उस अमृत तुल्य अनुभव से जुड़ने का अवसर प्रदान किया। महानदी,पैरी और सोंढ़ूर की तट पर बसा राजिम, राजधानी रायपुर से 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जो प्राचीन काल से वैष्णवों का तीर्थस्थल रहा है। सदियों पहले राजिम तीर्थ यात्राओं पर जाने वाले लोगों के लिए प्रमुख पड़ाव हुआ करता था। पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने की अपनी निरंतर कोशिशों के दौरान संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने “पाँचवा कुंभ” आयोजित किया।

श्राद्ध, तर्पण, पर्व स्नान, दान-पुण्य आदि धार्मिक कार्यों के लिए लोग इस संगम स्थल को प्रयागराज के समान पवित्र मानते हैं। आम विश्वास है कि यहां स्नान करने मात्र से ही मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते है, तथा मृत्यु उपरांत वह विष्णुलोक को प्राप्त होता है।

राजिम कुंभ-2016 का शुभारंभ करते हुए छत्तीसगढ़ के धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि देश और दुनिया में छत्तीसगढ़ को साहित्यिक और धार्मिक पहचान मिले, इसके लिए सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य स्वामी के आदेश और आशीर्वाद से अब राजिम कुंभ में ‘कल्प’ शब्द को अगले वर्ष से जोड़ा जाएगा।
अग्रवाल ने कहा, “राजिम कुंभ की भव्यता और दिव्यता को बढ़ाने का निर्णय हमने लिया है। राजीव लोचन मंदिर से लेकर कुलेश्वरनाथ महादेव के मंदिर व लोमष ऋषि आश्रम तक लक्ष्मण झूला बनाया जाएगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती एक ऐसी धरती है, जहां भगवान श्री राम ने भ्रमण किया। माता जानकी ने कुलेश्वर मंदिर बनाया। यह रत्नगर्भा धरती है। गांव-गांव में नवधा रामायण होती है। मां कौशल्या की यह जन्मभूमि है। भगवान श्रीराम यहां के भांजा हैं।



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